01 - " ईश्वरात्रम से देखा भास्कर "

HIndi Kavita written by Smt Varshaji Gehlot of Mt Abu

ईश्वरात्रम से देखा भास्कर ,

आधा बाहर आधा अन्दर ,

      दहकता पर आनन्द पूर्ण

      हुई अभिभूत।

करुणामय से करुणा हुई ,

मिटा अन्दर बाहर का भान

      नमस्कार किये, घुटना टेक

      तारणहार बस ........एक।