02 - Kavita in Hindi

Written by Smt Varshiji Gehlot of Mt Abu

धरती कितनी दूर ...... आकाश से,

उतना ही दूर ...... आसमाँ धरती से,

      मिल जोये वो, क्षितिज कहलाये,

      हँस कर वो , भी बोला

      कितने पास , कितने दूर।।